12 secrets of doctors

वो बारह बातें जो डाक्टर नहीं बताता रोगी को पर आपके लिए जानना है आवश्यक:
1. दवाइयों से डायबिटीज बढ़ती है अक्सर डायबिटीज शरीर में इंसुलिन की कमी होने से पैदा होती है। लेकिन बहुत कम लोग यह जानते हैं कि कुछ खास दवाईयों के असर से भी शरीर में डायबिटीज होती है। इन दवाइयों में मुख्यतया एंटी डिप्रेसेंट्स, नींद की दवाईयां, कफ सिरफ तथा बच्चों को एडीएचडी (अतिसक्रियता) के लिए दी जाने वाली दवाईयां शामिल हैं। इन्हें दिए जाने से शरीर में इंसुलिन की कमी हो जाती है और व्यक्ति को मधुमेह का इलाज करवाना पड़ता है।
2. बिना वजह लगाई जाती है कुछ वैक्सीन वैक्सीन लोगों को किसी बीमारी के इलाज के लिए लगाई जाती है। परन्तु कुछ वैक्सीन्स ऎसी हैं तो या तो बेअसर हो चुकी है या फिर वायरस को फैलने में मदद करती है जैसे कि फ्लू वायरस की वैक्सीन। बच्चों को दिए जाने वाली वैक्सीन डीटीएपी केवल बी.परट्यूसिस से लड़ने के लिए बनाई गई है जो कि बेहद ही मामूली बीमारी है। परन्तु डीटी एपी की वैक्सीन फेफड़ों के इंफेक्शन को आमंत्रित करती है जो दीर्घकाल में व्यक्ति की इम्यूनिटी पॉवर को कमजोर कर देती है।
3. कैन्सर हमेशा कैन्सर ही नहीं होता यूं तो कैन्सर स्त्री-पुरूष दोनों में किसी को भी हो सकता है लेकिन ब्रेस्ट कैन्सर की पहचान करने में अधिकांशतया डॉक्टर गलती कर जाते हैं। सामान्यतया स्तन पर हुई किसी भी गांठ को कैंसर की पहचान मान कर उसका उपचार किया जाता है जो कि बहुत से मामलों में छोटी-मोटी फुंसी ही निकलती है। उदाहरण के तौर पर हॉलीवुड अभिनेत्री ए ंजेलिना जॉली ने मात्र इस संदेह पर अपने ब्रेस्ट ऑपरेशन करके हटवा दिए थे कि उनके शरीर में कैन्सर पैदा करने वाला जीन पाया गया था।
4. दवाईयां कैंसर पैदा करती हैं ब्लड प्रेशर या रक्तचाप (बीपी) की दवाईयों से कैन्सर होने का खतरा तीन गुना बढ़ जाता है। ऎसा इसलिए होता है क्योंकि ब्लडप्रेशर की दवाईयां शरीर में कैल्सियम चैनल ब्लॉकर्स की संख्या बढ़ा देता है जिससे शरीर में कोशिकाओं के मरने की दर बढ़ जाती है और प्रतिक्रियास्वरूप कोशिकाएं बेकार होकर कैंसर की गांठ बनाने में लग जाती हैं।
5. एस्पिरीन लेने से शरीर में इंटरनल ब्लीडिंग का खतरा बढ़ जाता है हॉर्ट अटैक तथा ब्लड क्लॉट बनने से रोकने के लिए दी जाने वाली दवाई एस्पिरीन से शरीर में इंटरनल ब्लीडिंग का खतरा लगभग 100 गुणा बढ़ जाता है। इससे शरीर के आ ंतरिक अंग कमजोर होकर उनमें रक्तस्त्राव शुरू हो जाता है। एक सर्वे में पाया गया कि एस्पिरीन डेली लेने वाले पेशेंट्स में से लगभग 10,000 लोगों को इंटरनल ब्लीडिंग का सामना करना पड़ा।
6. एक्स-रे से कैन्सर होता है आजकल हर छोटी-छोटी बात पर डॉक्टर एक्स-रे करवाने लग गए हैं। क्या आप जानते हैं कि एक्स-रे करवाने के दौरान निकली घातक रेडियोएक्टिव किरणें कैंसर पैदा करती हैं। एक मामूली एक्स-रे करवाने में शरीर को हुई हानि की भरपाई करने में कम से कम एक वर्ष का समय लगता है। ऎसे में यदि किसी को एक से अधिक बार एक्स-रे क रवाना पड़े तो सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।
7. सीने में जलन की दवाई आंतों का अल्सर साथ लाती है बहुत बार खान-पान या हवा-पानी में बदलाव होने से व्यक्ति को पेट की बीमारियां हो जाती है। इनमें से एक सीने में जलन का होना भी है जिसके लिए डॉक्टर एंटी-गैस्ट्रिक दवाईयां देते हैं। इन मेडिसीन्स से आंतों का अल्सर होने की संभावना बढ़ जाती है, साथ ही साथ हडि्डयों का क्षरण होना, शरीर में विटामिन बी12 को एब्जॉर्ब करने की क्षमता कम होना आदि बीमारियां व्यक्ति को घेर लेती हैं। सबसे दुखद बात तब होती है जब इनमें से कुछ दवाईयां बीमारी को दूर तो नहीं करती परन्तु साईड इफेक्ट अवश्य लाती हैं।
8. दवाईयों और लैब-टेस्ट से डॉक्टर्स कमाते हैं मोटा कमीशन यह अब छिपी बात नहीं रही कि डॉक्टरों की कमाई का एक मोटा हिस्सा दवाईयों के कमीशन से आता है। यहीं नहीं डॉक्टर किसी खास लेबोरेटरी में ही मेडिकल चैकअप के लिए भेजते हैं जिसमें भी उन्हें अच्छी खासी कमाई होती है। कमीशनखोरी की इस आदत के चलते डॉक्टर अक्सर जरूरत से ज्यादा मेडिसिन दे देते हैं।
9. जुकाम सही करने के लिए कोई दवाई नहीं है नाक की अंदरूनी त्वचा में सूजन आ जाने से जुकाम होता है। अभी तक मेडिकल साइंस इस बात का कोई कारण नहीं ढूंढ पाया है कि ऎसा क्यों होता है और ना ही इसका कोई कारगर इलाज ढूंढा जा सका है। डॉक्टर जुकाम होने पर एंटीबॉयोटिक्स लेने की सलाह देते हैं परन्तु कई अध्ययनों में यह साबित हो चुका है कि जुकाम 4 से 7 दिनों में अपने आप ही सही हो जाता है। जुकाम पर आपके दवाई लेने का कोई असर नहीं होता है, हां आपके शरीर को एंटीबॉयोटिक्स के साईड-इफेक्टस जरूर झेलने पड़ते हैं।
10. एंटीबॉयोटिक्स से लिवर को नुकसान होता है मेडिकल साइंस की सबसे अद्भुत खोज के रूप में सराही गई दवाएं एंटीबॉयोटिक्स हैं। एंटीबॉयोटिक्स जैसे पैरासिटेमोल ने व्यक्ति की औसत उम्र बढ़ा दी है और स्वास्थ्य लाभ में अनूठा योगदान दिया है, लेकिन तस्वीर के दूसरे पक्ष के रूप में एंटीबॉयोटिक्स व्यक्ति के लीवर को डेमेज करती है। यदि लंबे समय तक एंटीबॉयोटिक्स का प्रयोग कि या जाए तो व्यक्ति की किडनी तथा लीवर बुरी तरह से प्रभावित होते हैं और उनका ऑपरेशन करना पड़ सकता है।
11. अनेक डाक्टर खुद योग और देसी दवाओं से अपना और अपने परिवार का इलाज करवाते हैं क्योंकि उन्हें पता है कि आयुर्वेद और योग के साइड इफ़ेक्ट नही हैं और इससे रोग भी जड़ से समाप्त होते हैं.
12. बाइपास सर्जरी जो कि हृदयघात (दिल का दौरा) के रोगियों के लिए बताई जाती है वो डाक्टर खुद अपने लिए कभी नही सोचते क्योंकि एक तो यह स्थाई इलाज नही है दूसरा इस से दौरा फिर से पड़ने के मौके कम नही होते, खुद पर ऐसी समस्या आने पर डाक्टर घिया (लौकी) का रस या अर्जुन की छाल का काढ़ा बना कर पीते हैं या रोज प्राणायाम और योग करते हैं.
उनकी तो धंधे की मजबूरी है पर आप तो बता सकते हैं ये राज़ ........ धन्यवाद.

Recruitment in sports department will be soon

खेल विभाग में जल्द भरेंगे खाली पड़े पद:अनिल विज कांग्रेस सरकार में निकलीं भर्तियां कैंसिल

खेल विभाग में जल्द भरेंगे खाली पड़े पद:अनिल विज

कांग्रेस सरकार में निकलीं भर्तियां कैंसिल
प्रवेन्द्र सिंह | अम्बाला

खेलविभाग में अब जल्द ही नई नियुक्तियां की जाएंगी। ऐसे संकेत स्वास्थ्य और खेल मंत्री अनिल विज ने दिए हैं। आठ साल पहले हुड्डा सरकार के दौरान 2007 में खेल युवा विभाग में 201 नौकरियां निकाली गई थीं लेकिन आज तक विभाग ने इन पर किसी की नियुक्ति ही नहीं की।
वित्त विभाग भी इन नियुक्तियों के लिए सालाना 19.34 करोड़ रुपए भेजता रहा। लेकिन, नियुक्तियां होने से खेल युवा विभाग इस बजट को वापस वित्त विभाग को भेज देता था। इस बात की जानकारी जब अनिल विज को लगी तो उन्होंने सभी नियुक्तियों को रद्द करने के आदेश दे दिए। खेल मंत्री के अनुसार अब सरकार विभाग में कितने पद खाली हैं, इसके अनुसार जल्द ही नई भर्ती करेगी। नई सरकार के बनने से पहले तक यदि खेल युवा विभाग को इन नौकरियों पर नियुक्ति नहीं करनी तो वह सरकार को इस बात से अवगत करा सकते थे और इन नौकरियों के लिए पास बजट को सरकार द्वारा कहीं और उपयोग में लाया जा सकता था। कारी खाली पदों पर नियुक्ति करते तो कई युवाओं को रोजगार के अवसर प्राप्त हो सकते थे।
पता लगते ही मैंने रद्द करने के आदेश दिए थे
^पतालगते ही मैंने इन भर्तियों को रद्द करने के आदेश दे दिए थे। क्योंकि पास बजट को सही उपयोग में लाया जा सके। सरकार खाली पदों का ब्योरा जुटाकर जल्द नई भर्ती कर सकती है। खाली पदों को नहीं भरने के लिए जो भी जिम्मेदार होगा, उसको बख्शा नहीं जाएगा। -अनिल विज, स्वास्थ्य और खेल मंत्री

Improvement in education, school will be hitec

विभाग ने शिक्षा में सुधार के लिए बनाई योजना हाइटेक होंगे स्कूल ।
पहली से पांचवी छठी से आठवीं कक्षा की होंगी परीक्षाएं
गवर्नमेंट स्कूलों के स्टूडेंट्स का डाटा होगा ऑनलाइन
अब राजकीय स्कूल भी हाइटेक होने जा रहे हैं। इसके लिए प्रत्येक विद्यार्थी की शिक्षा का डाटा ऑनलाइन उपलब्ध होगा। राजकीय स्कूलों में शिक्षा का सुधार करने के लिए यह योजना तैयार की गई है, जिसके तहत 28 से 31 जनवरी तक पहली से आठवीं कक्षा में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की परीक्षा ली जाएगी। इतना ही नहीं विद्यार्थियों के परीक्षा में प्राप्त अंकों के आधार पर उसकी रिपोर्ट भी चंडीगढ़ में शिक्षा निदेशालय को भेजी जाएगी, जिसके बाद यह डाटा स्कूल में होने वाली परीक्षाओं के बाद तुरंत ऑनलाइन अपडेट किया जाएगा।
पहुंचे तैयार प्रश्न पत्र :
जिला स्तर पर इस योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए पहली से पांचवी कक्षा तक के विद्यार्थियों के लिए तैयार प्रश्न पत्र भी जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी के कार्यालय में पहुंच चुके हैं। वहीं छठी से आठवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों के लिए प्रश्नपत्रों को स्कूल शिक्षक ही तैयार करेंगे। सभी स्कूलों में 28 जनवरी से 31 जनवरी तक परीक्षाएं ली जाएंगी। इसके बाद दो फरवरी तक मौलिक शिक्षा अधिकारी के कार्यालय में विद्यार्थियों के प्राप्त अंकों की रिपोर्ट बनाकर भेजी जाएगी। जिला स्तर पर रिपोर्ट आने के बाद पांच फरवरी तक इस रिपोर्ट को चंडीगढ़ में मौलिक शिक्षा निदेशालय को भेजा जाएगा।
योजना सुधारेगी शिक्षा का स्तर:
जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी धीरज मलिक ने बताया कि यह योजना स्कूलों में शिक्षा सुधार लाने में कारगर साबित होगी। पहली से पांचवी कक्षा तक के प्रश्न पत्र पहुंच चुके हैं। 28 से 31 जनवरी तक स्कूलों में परीक्षाएं होंगी। इसके बाद स्कूलों से वर्गों के अनुसार डाटा लेकर निदेशालय को भेजा जाए ।

मुख्यमंत्री की ना से टूटी कंप्यूटर शिक्षकों की उम्मीद

: प्रदेश के सरकारी स्कूलों में लगभग
दो वर्ष से सेवारत कंप्यूटर
शिक्षकों की विभाग में समायोजित होने
की उम्मीद पूरी तरह से टूट गई है।
मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने
शिक्षकों की नियुक्तियों को बैक डोर
एंट्री करार दिया है। आउटसोर्सिग के तहत भरे
गए पदों की विभागों में समायोजन की कोई
नीति न होने की बात कहकर सरकार ने
शिक्षकों के लिए सारे रास्ते बंद कर दिए हैं। अब
शिक्षकों के सामने कंपनियों के तहत
डयूटी बजाने और रुका हुआ एक वर्ष का वेतन
हासिल करने की चुनौती है।
सरकार के कड़े रुख ने शिक्षकों की मुश्किलों में
भी इजाफा किया है। अभी दो महीने
कंपनियों के साथ सरकार का कंप्यूटर
शिक्षा को लेकर करार है और मार्च तक इन्हीं के
तहत शिक्षकों को सेवाएं देनी होगी। मार्च में
कंपनियों का सरकार से समझौता खत्म
हो जाएगा, नए सिरे से टेंडर लेने पर कंपनियां इन
शिक्षकों को भर्ती करें या नहीं, ये उनके
अधिकार क्षेत्र में है। ऐसे में लगभग 27
सौ शिक्षक दो महीने वाले सड़क पर भी आ
सकते हैं। करार खत्म होने से पहले कंपनियों से एक
वर्ष का रुका वेतन पाने के लिए
भी शिक्षकों को काफी मशक्कत
करनी होगी। शिक्षा विभाग के
अधिकारियों के भी पक्ष में न होने के कारण
सिक्योरिटी राशि, प्रशिक्षण के नाम पर
ली फीस और ईएसआइ के नाम पर वसूली गई
राशि भी शिक्षकों की फंसती नजर आ
रही है। बीते एक वर्ष से कंप्यूटर शिक्षक समय-
समय पर आंदोलनरत करते रहे हैं, लेकिन
कंपनियों की हनक के आगे उनकी एक नहीं चल
रही। अब कंप्यूटर शिक्षकों ने दोबारा से आमरण
अनशन का निर्णय लिया है। यह
कितना सही साबित होता है, ये तो भविष्य
के गर्भ में है।

प्रमोशन में आरक्षण : प्रदेश सरकार को नोटिस ** प्रमोशन में आरक्षण रद्द करने के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंचे एससी कर्मी

प्रमोशन में आरक्षण : प्रदेश सरकार को नोटिस
प्रमोशन में आरक्षण रद्द करने के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंचे एससी कर्मी
एकल बेंच के फैसले के खिलाफ अपील दाखिल
मामले की अगली सुनवाई 28 जनवरी को चंडीगढ़ : पदोन्नत एससी कर्मचारियों की तरक्की वापस लेने के एकल बेंच के फैसले को अब पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में अपील के माध्यम से चुनौती दी गई है। एकल बेंच ने तरक्की में आरक्षण के फैसले को रद्द कर दिया था। अपील में एकल बेंच के फैसले पर रोक लगाने की मांग भी की गई है। हाईकोर्ट ने सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 28 जनवरी को होगी। एससी कर्मचारियों ने अपील में कहा है कि यदि एकल बेंच के फैसले का अनुपालन हो गया तो सामान्य वर्ग के कर्मचारियों को तरक्की दे दी जाएगी। ऐसे में असमंजस बन जाएगा और सामान्य वर्ग के मुलाजिमों को मिलने वाली तरक्की अपील के फैसले पर ही आधारित होकर रह जाएगी। यह भी कहा गया है कि अपील मंजूर होने की सूरत में सामान्य वर्ग के कर्मचारियों की तरक्की रद्द करने की स्थिति पैदा होगी। लिहाजा, एससी कर्मचारियों की तरक्की वापस लेने के एकल बेंच के फैसले पर तुरंत रोक लगा दी जाए। अपील में कहा गया है कि एकल बेंच ने कई तथ्यों पर गौर नहीं किया, लिहाजा फैसला रद्द किया जाना चाहिए। यह है एकल बेंच का फैसला एससी कर्मचारियों को तरक्की में 20 प्रतिशत आरक्षण देने के लिए वर्ष 2013 में नीति बनाई थी। इस नीति को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी। याचिकाकर्ताओं की दलील थी कि इससे पहले वर्ष 2006 में भी ऐसी ही नीति बनी थी, जिसके खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। तब हाईकोर्ट ने नीति रद्द कर दी थी और मामला सुप्रीम कोर्ट तक गया था। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि भले ही संविधान में संशोधन के मुताबिक राज्य सरकार एससी कर्मचारियों को तरक्की में आरक्षण दे सकती है। लेकिन, इससे पहले यह डाटा एकत्र करना जरूरी है कि कितने कर्मचारियों को लाभ देना है या कर्मचारियों के वर्ग के अनुसार कितने एससी कर्मचारियों की तरक्की की जानी है। हाईकोर्ट में चले मामले में सरकार ने कहा था कि वर्ष 2006 की नीति रद्द कर 2013 में नीति बनाई गई है। यह नीति नौकरियों और सरकारी सहायता प्राप्त संस्थाओं में दाखिले में आरक्षण के संबंध में है। इसका तरक्की में आरक्षण से कोई वास्ता नहीं है। एससी कर्मचारियों को जो तरक्की दी गई है, वह एक्सलरेटिड तरक्की है। सरकार ने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मुताबिक डाटा एकत्र करने के लिए कमेटी गठित की जा चुकी है और अंतिम रिपोर्ट आना बाकी है। ऐसी परिस्थितियों में हाईकोर्ट के जस्टिस राजेश बिंदल ने 2013 की नीति रद्द करते हुए एससी कर्मचारियों को दी तरक्की वापस लेने का निर्देश दिया था। हाईकोर्ट ने 2013 की नीति बनने के वक्त के मुख्य सचिव को अदालत के आदेश की अवमानना का जिम्मेवार ठहराते हुए कहा था कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश की जानकारी होने के बावजूद डाटा एकत्र किए बगैर तरक्की में आरक्षण रख दिया गया। एकल बेंच ने मुख्य सचिव के खिलाफ अवमानना कार्रवाई चलाने का निर्देश भी दिया था।

आज नहीं लगने देंगे स्कूल भिवानी

आज नहीं लगने देंगे स्कूल भिवानी : प्रदेश के बड़े अध्यापक संगठन हरियाणा विद्यालय अध्यापक संघ ने ऐलान किया है कि मतदाता दिवस के दिन यानी 25 जनवरी को रविवार का अवकाश है तथा अध्यापक स्कूलों में हरगिज नहीं जाएंगे। अगर सरकार ने किसी तरह की मनमानी की तो अध्यापक संघ बर्दाश्त नहीं करेगा व आंदोलन किया जाएगा। प्रदेश के अध्यापक संघ ने ऐलान किया है कि रविवार एवं राजपत्रित अवकाश के दिन स्कूल नहीं लगने दिए जाएंगे। आज भिवानी में हरियाणा विद्यालय अध्यापक संघ के प्रदेशाध्यक्ष मासटर वजीर सिंह ने कहा कि भाजपा सरकार राजपत्रित अवकाशों के दिन कोई न कोई आयोजन कर देती है, चाहे वह महान व्यक्तियों की जयंती (गांधी जयन्ती, 2 अक्तूबर), चाहे त्योहार (क्रिसमस व मकर संक्राति) या रविवार हो। इसी कड़ी में 25 जनवरी को मतदाता दिवस मनाने के नाम पर रविवार की छुट्टी रद्द कर दी गई है। उन्होंने कहा कि शिक्षा अधिकार कानून 2009 अध्यापकों से गैर शिक्षक कार्य लेने पर रोक लगाता है। इसी को मानते हुए शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव टीसी गुप्ता ने तीन दिन पहले पत्र जारी किया है कि मौलिक स्कूल अध्यापकों से गैर शैक्षिक कार्य नहीं लिया जाएगा। दूसरी तरफ छुट्टी वाले दिन मतदाता दिवस मनाने के लिए स्कूलों में आने की बात कह रहे हैं। यह विरोधाभास समझ से परे है। मतदान सम्बंधी ड्यूटी रद्द की जा चुकी हैं। वैसे तो बीएलओ को छोड़ कर अन्य अध्यापकों का मतदाता दिवस के दिन कोई कार्य नहीं है, फिर भी सरकार अध्यापकों को रविवार की छुट्टी या अन्य राजपत्रित अवकाश के दिन बुलाकर काम लेना चाहती है तो विभाग को प्रतिपूर्ति अवकाश का पत्र जारी करना चाहिए। हरियाणा विद्यालय अध्यापक संघ के प्रदेशाध्यक्ष मा. वजीर सिंह, जिला प्रधान सुखदर्शन सरोहा नेे कहा कि अध्यापक रविवार को अवकाश मनाएंगे व छुट्टी के दिन स्कूल नहीं जाएंगे। सरकार व विभाग के अधिकारी शैक्षिक कलेंडर से अनावश्क व मनमानी छेडख़ानी करके वातावरण बिगाड़ने का काम कर रहे हैं। अध्यापक संघ इस डराने-धमकाने की नीति के माध्यम से खौफ पैदा करने का कड़ा विरोध करेगा। अध्यापक संघ ने यह सूचना सभी जिला व खण्ड कमेटियों के माध्यम से अध्यापकों को दे दी है। अध्यापकों में रोष है और वे स्कूल नहीं जाएंगे। हरियाणा एजुकेशन मिनिस्ट्रीय स्टाफ एसोसिएशन के प्रदेशाध्यक्ष संदीप सांगवान का भी कुछ ऐसा ही कहना था।
There's no school today will
Bhiwani: Haryana School Teachers Association of State announced the largest teacher organization that voter's Day holiday, the day is Sunday January 25 will not go to schools and teachers. If the government will not tolerate any arbitrary teachers' union and the movement will be.
State Teachers Association has announced that Sunday and gazetted holidays will be taken out of school. Today Bhiwani Haryana State School Teachers Union Masters Wazir Singh said the BJP government gazetted holidays to celebrate someone's day, anniversary of the great men he (Gandhi Jayanti, 2nd October), whether festival (Christmas and Makar Sankranti ) or Sunday. This link is the name of Sunday January 25 voter Day holiday has been canceled.
The Right to Education Act 2009 prohibits teachers to non-teaching tasks. Assuming that the Secretary of the Department of Education has issued three days before TC Gupta fundamental school teachers will not be non-academic work. On the other hand, come to school on a holiday to celebrate the Day of the voters are saying. This paradox is beyond comprehension. Voting-related duties have been canceled. Well, except Bielo Voters Day's of no other teachers, even the government teachers or other gazetted holidays on Sunday called off plans to work in the department issuing the reimbursement should leave.
MA State of Haryana School Teachers Association. Wazir Singh, district head Sukdrshn Sroha umbrella body will celebrate the holidays and vacation days Sunday School teacher will not. The academic calendar unnecessary and arbitrary government and the authorities are working Cedkhani poisoning the environment. Teachers union through the coercive policy will oppose terrifying. Teachers Union district and block committees through the information given to teachers. Teachers and the school will not rage. Haryana State Education Association Sandeep Sangwan Ministryy staff had to say something similar.                

"परीक्षाओं का मजाक बना रही है सरकार" फतेहाबाद :

सर्वकर्मचारी संघ से संबद्ध हरियाणा विद्यालय अध्यापक संघ ने छुट्टियों के समय स्कूल खोलने और एक दिन में दो-दो विषयों की परीक्षा लेने का विरोध करते हुए कहा है कि सरकार परीक्षाओं का मजाक बना रही है। सरकार का रवैया अगर ऐसा रहा तो अगले माह से आंदोलन तेज भी किया जा सकता है। शनिवार को संघ के राज्य कमेटी सदस्य राजपाल मिताथल, जिला प्रधान रघुनाथ मेहता जिला सचिव कृष्ण नैन की आेर से जारी संयुक्त बयान में कहा गया है कि हरियाणा सरकार शिक्षा विभाग के अधिकारी घोषित छुट्टियों को डकारना चाहते हैं और बिना योजना के अलग-अलग परीक्षाओं का नाम देकर बच्चों सरकारी शिक्षा विभाग के स्कूलों को बदनाम करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि अध्यापकों से अध्यापन के अलावा अनेक कार्य लिए जाते हैं जिनको बंद करना चाहिए। परीक्षाओं की योजना स्कूल आरंभ होने से पहले ही बननी चाहिए। कभी तो विभाग कहता है कि मासिक परीक्षाएं लेनी है, कभी कहता है जनवरी माह में 100 अंकों का पेपर लेना है, कभी कहता है समेस्टर सिस्टम लागू है। ऐसे में अध्यापक कैसी परीक्षाएं लें, इसको लेकर अध्यापक बच्चा दोनों असमंजस में रहता है। उन्होंने कहा कि 100 अंकों का पेपर वार्षिक परीक्षाओं में लेना होता है जबकि ये आनन-फानन में विभाग की मेल पर पत्र डाल देते हैं जिसकी सूचना स्कूलों को समय पर मिलती ही नहीं। दो दिन पहले सूचना आई कि 20 अंकों का पेपर लेना है।

Guest teachers honge regular

voter day 25 jan ,


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